9 July to December 2023

 कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,

इस्तीफ़ा फाड़ ही डाला अरे इसे बर्खास्त होना था।
मणिपुर में केंद्रीय हुक़ूमत को सड़कों पर होना था।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
बुद्धं शरणं, धम्मं शरणं और संघं शरणं में जाएं।
शिक्षित बने, संगठित रहें और संघर्ष करते जाएं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
संसकिरत है कूप जल, भाखा बहता नीर ये कहते रहे कबीर।
ब्राह्मणवाद में जन्म और आत्मा के झूठे झंझट झेले शरीर।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
टमाटर की उसे इस क़दर दरकार रहती है।
शहर के हर मुशायरे में अपना नाम देती है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
प्रधान ने कहा हैं कि कितना GB सस्ता हुआ है।
एक दूसरे GB ने कितनों की बेचारगी को छुआ हैं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
प्रवेश शुक्ला विसर्जन करे उसके मुंह पर अपने मूत का।
मूल निवासी भारत का जो है गरीबी शोषित मेरे पूत सा।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हर मर्द में एक औरत छिपी हुई हर औरत में एक पुरुषत्व।
कव्वाली में मर्द मान ले और याद करो काली का वो कृत्य।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
न इती न इती इन्हीं दो राहों पर मार्गदर्शक धर्मग्रंथ खड़े।
कल्पनाओं में अटके ज्ञानी देख भक्त आपस में ही लड़े।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
दफ़्तर में औकात उसकी दिखाने का यह धूर्त अंदाज़ तुम्हारा।
बात फेर कुर्सी के अपनी नीचे तुमने कुछ छीटों को दिखाया।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
मनु शतरूपा शरीर एक से उत्पन्न जिसे कहते ज्ञानी काय।
बूढ़ा ब्रह्मा बेटी पर मोहित हुआ यह अब मरीचि ही बताए।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
भक्तों को सीमा हैदर में सानिया मिर्ज़ा दिख रही है।
इसीलिए ये कहानी इनकी मिडिया में दिख रही है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
"मणिपुर"

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
मलाल आंख ना होने का उस मर्द अंधे राजा को भी रहा होगा।
चीरहरण करे दुष्ट बेटे जब संजय ने कान में उसके कहा होगा।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
मौत अवस्था एक है जिससे उपजे केवल उनका धर्म।
आडंबर से जाति उपजी जिन्हें देखना था केवल कर्म।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
चलो शिगुफा अब्दुल का एक छेड़ा जाए।
मालवेयर सोचे बचने में इसे भेड़ा जाए।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
बहस गज़ब चाय पर सावन में देखी वंदे शानदार बोगी की।
गाय भैंस जैसे जानवर के दूध से बनी तो मांसाहार होगी ही।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
पीपल बुद्ध की देन है यह कहें भूत का वास।
भूत डराता उनको जो इंसानों में ढूंढ़े जात।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
गिरगिट सा रंग बदलने की उसे अब ज़रूरत रही नहीं।
इंडिया देट इज़ भारत का पहला आर्टिकल पढ़ा नहीं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
सन चौदह सौ चौसठ ईस्वी से पुराना कुछ नहीं।
पाली का संस्कृत में अनुवाद से ज़्यादा कुछ नहीं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
जिसे नेता बना दिया उसे नुमाईश का शौक है।
चुपचाप खूं चूसे डंकापति आजमाईश जौक है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
"इतना पैसा नहीं है" कह कर रो देता है सब्ज़ी विक्रेता।
ट्रिलियन बढ़ा के कोई फर्ज़ी राष्ट्रवादी फ़िर से बिफरेगा।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत ने नूंह को खड़ा किया है मणिपुर की आड़ में।
ये दोनो मुख्य मंत्री चाहें जाएं प्रदेश की जनता भाड़ में।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे
सर्वे अब पुराने मंदिरों का भी कराया जाए।
मंदिर बन चुके मठों को सामने लाया जाए।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
चांस की बात है जिसे दर्शन में कहते नियतिवाद।
ना किसी से रहा वाद मेरा ना रहा किसी से विवाद।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
व्यवधान से प्रावधान चरण चुंबक करने लगे।
मारे हवस आप उसे उड़ता चुम्बन कहने लगे।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
वर्तमान अतीत से विद्रोह है बस नहीं लोगों को दिख्ता।
समझ में आ जाएगा गर देखें कोई बाप-बेटे का रिश्ता।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
"हां " करता नित नए सृजन, "नहीं" कराएं विध्वंस।
"हां " में ऊर्जा भविष्य की "नहीं" में खात्में का दंश।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
जो परिवारवाद पर चिल्ला कर सबको दिखाते हैं।
वही राजाओं के वंशजो को अपने दल में लाते हैं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
खींची सेल्फी अपलोड किया और पाया पत्र प्रमाण।
डाटा चला विदेश में अब ख़ुद पहचान का है त्राण।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत के मक्खनबाज़ सिफारिशियों का खुला राज़।
हिंदी के नए प्रोफेसरों की लिखी हिंदी को पढ़ा आज।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
काटा कैसे जाए जिसे कहें झटका या हलाल।
मर गया ख़ुद बख़ुद चलों मसाला करें तैयार।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
सच सामने आएगा कोई रोक सकता नहीं।
ग्रंथों में पृथ्वी को कभी चपटा लिखा गया।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
ख़बरदार जो अब जुमलों का नाम लिया।
जितना था उसने खा लिया खिला दिया।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
संविधान बदलने की तड़फ बिबेक में साफ़ दिखती है।
संगोली, अनपढ़, देशद्रोही भक्तों में अक्ल किसकी है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
"जात पात तोड़क मंडल" का नाम बदला परमानंद ने।
"हिंदू साम्यवाद मंडल" कहा अपने चतुर्वर्ण के दंभ में।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
गोदी में बिठाया था पर अब लगा मूतने वो।
ब्लैक एंड वाइट हो गया तैयार रूठने को।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत जानती है कैसे भावनाएं भड़काई जाती हैं।
जब भी घिरती है तो चीज़ें देश तक पहुंचाई जाती हूं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
बच्चा वो पिटता छोटा स्कूल में दलित मुसलमान का।
द्रोणाचार्य आज भी जिंदा हैं नाम ले गुरु सम्मान का।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
स्टंट रगों को खुला रखते हैं लहू के दौड़ने को।
फ़िर मेरी मां का दिल इस्पात का हुआ जाता है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत ने पट्टी महंगे सिलेंडर की हमे मल्दी है।
रूपये 200 किया कम, क्या चुनाव जल्दी है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
ख़बर फसादों की समय बर्बाद करती है।
कौमे हिंदू मुसलमान में आबाद रहती है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
लहू की रवानगी में अपनी रगों को हमेशा साफ़ रखें।
गर्म पानी पीजिए ठंडा जो दे कोई तो कहें माफ़ करें।।



कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत मुंह पर बांधने को पट्टी हर बार कहे।
ख़बर तो वह है जो आपको ख़बरदार करे।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिलें कहते थे,
संस्कारी लौंडा भी उंगली कर अधीर हो गया है।
पकड़ाया तो देश की आड़ ले गंभीर हो चला है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
चलो नाम बदलें कि फ़िर कब्रिस्तान का ज़िक्र करें।
हुक़ूमत को मालूम नहीं आख़िर उसे करना क्या है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
गौरी लंकेश और कितनी जो हत्या होती हैं राह में।
बुद्धिजीवी सोचे कि इंडिया के बारे क्या विचार दें।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
ये चकाचौंध, ये बंदिशे, ये खर्चों की नुमाईश।
देखिए राष्ट्रीय उद्योगपति को मिलता क्या है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
ज़िक्र मेरा भी दस्तावेजों में मुअर्रिख़ करेगा।
मैंने भी एक सेवकी तुगलक को देखा है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत कहे यहां अस्सी करोड़ जनता देश की दान में खाना खाएं।
वहीं मेहमानों को सोने चांदी की प्लेट लिए राष्ट्रीय चिन्ह में खाना खिलाएं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
त्रिपिटक, गीता, कुरान, गुरुग्रंथ, बाईबिल कोई आज लिखे।
उसे मानवता के मद्देनजर सिर्फ़ भारत का संविधान दिखे।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
दोस्ती अमेरिका से भारत की एक क़ीमत लेगी।
प्यादा ढूंढते हैं, पाक की हालत नहीं अनदेखी।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हीरा पायो गाँठ गठियायो अब उसकी नुमाईश ठीक नहीं।
ठीक तो ठीक सही मैंने हर बार की फ़रमाइश भीख कही।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
इसको वीराने में भी जश्न मनाने का हुनर आता है।
ले पी.आर टीम शमशान से बारात ले गुजर जाता है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
नाराज़ है, दुःखी है, गुस्सा है, वो परेशान बहुत है।
जब से पढ़ा संविधान वो देख कर हैरान बहुत है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
क़ायल नहीं हूं मैं पत्थरों में प्राण प्रतिष्ठा का।
अगर ये पत्थर पिघल जाएं तो कोई बात बने।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
नाविका का कंगना से आज़ादी पर पूछना।
ज़रूरी है अक्ल और ज़बान ठिकाने रखना।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत जानती है कब किसे कहां और क्यों कहना है।
अभी दस साल हुए लगा के आग पांच और करना है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
माननीय सदस्यगण कुर्सी देख कहां बैठा वो जगह देख।
बदज़बान गालीबाज़ मुँहज़ोर बदमिज़ाज हम रहें हैं देख।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
मीरा विष का प्याला पी गई पर छूटा ना रैदास।
इसी धर्म में लिखी थी जिसको ना छूने की बात।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
मुक्ति को पद समझ कर करने लगे तैयारी।
मंत्र रटे, बलियां दे डाली ले ली हर बीमारी।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
चौखट घर की मेरे आने जाने की ख़बर रखती हैं।
रिश्ते इंसानी ही हों अब ये कोई ज़रूरी तो नहीं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
गर्भवती धर्मपत्नी को पुरुष घर से निकाला करते थे।
राज्य में उसके सभी पुरुषोत्तम धर्म निभाया करते थे।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
अहंकार नेता बना कर दिया पति ने पत्नी से उदघोष।
मेरी सास में कमी बहुत पर मानू तुम्हारी सास निर्दोष।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
ज़मीन ठाकुर की ठाकुर का कुआँ पानी ठाकुर का।
सनातनी आरक्षण के मज़े लेता लौंडा ठाकुर का।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
दिन भर वो ख़ुद को गांधी का चेला दिखाते रहे।
लिए झाड़ू हाथ में वो पार्क में फ़ोटो खिंचाते रहे।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
चौदह में झाड़ू तेईस में झाड़ू इसे तरक्की नहीं कहते।
तरक्की औज़ारो में नहीं, ये ख़ुद को चांद पर कहते।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
चौदह में झाड़ू तेईस में झाड़ू इसे तरक्की नहीं कहते।
तरक्की औज़ारो में नहीं, ये ख़ुद को चांद पर कहते।।


कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
चौदह में झाड़ू तेईस में झाड़ू इसे तरक्की नहीं कहते।
तरक्की औज़ारो में नहीं, ये ख़ुद को चांद पर कहते।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
जैनियों का उल्लेख नहीं कुछ और बुद्ध से करते द्विज द्वेष।
रैदास सनातनियों का पर्दाफाश करते ले गुरु का भेष।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिलें कहते थे,
इन मौलवियों ने ही बिगाड़ी है दिली ज़बान उर्दू की।
ग़ज़ल की ख़ुदा से कम साक़ी से ज़्यादा तवक़्क़ो।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
इज़राइल और फिलिस्तीन कहने में अटकती नहीं ज़बान।
देश का मणिपुर है जो स्याही अख़बार की सुखा देता है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत को दंगा कराने का बहाना चाहिए।
वो ताक में है कि कोई त्यौहार आना चाहिए।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हमास और मौसाद का चलो ज़िक्र तो सुना।
एक हम थे जो धर्म में ही गिरह खोल रहे थे।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत को आईना दिखाते रहें हैं लोग।
वो बात और है कि ये फ़िर बैठ जाते हैं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
तेरा बचकर निकलना और मुझ पर हंसती तेरी सहेलियां।
तौबा, घर पर आज सुनना ही पड़ेगा मुझे जॉन एलिया।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
झूठ को दलीलों की ज़रूरत पड़ेगी।
झूठ कभी भी अकेला नहीं चलता।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत है ये जाति की पैदाइश के साथ।
झूठ बोलती है ये पूरी सच्चाई के साथ।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
कहानियां गढ़ कही और साबित था भगवान।
आडंबर कैसा रचा फ़िर भी संत शिरोमणि रैदास।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
धर्म के आड़ में वो भांग पिला कर ज़िंदा जलाते जाएं।
विलियम कैरी सती प्रथा को रोके साथ में मोहन राय।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हेलमैट पहन उड़ते हैं ये पंखे लगा के।
ये दलाल ख़बरी मणिपुर में कहां थे।।


कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
खोपड़ी में मत भरो तथ्यों को हलक से उतर जाने दो।
माने तो कुछ नहीं होगा बात बनेगी तुम अगर जाने तो।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत चाहती है कि संसद में पूछे उसकी मर्ज़ी का सवाल।
ख़ैर ये सांसद भी देखेगी कि ना उड़े लोकतंत्र का मज़ाक।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
धर्मराज लगाए जुए में फ़िर हारे ख़ुद की पत्नी का दांव।
मर्यादापुरुषोत्तम निकाले घर से ख़ुद की पत्नी का पांव।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत आवाम को सच बताने में सबको रोक देती है।
फिक्की के मंच से लिए मुंह भुखमरी पर भौंक देती है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
शिक्षक ज्ञान दें रहे थे कक्षा में पर ज्ञान था निरा एक्सपायरी।
बासी दुर्गंध उठ रही थी अब थी मेरे जैसे सफ़ाईकर्मी की बारी।।


कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
अर्थी के कंधे बदलते हैं ये अब हिंदू, मुसलमां शाम को।
गुलामी आत्मा को नष्ट देती हैं और हम पूजें किसी नाम को।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
राजा के पैर में कांटा लगा और पूरी धरती पाट ली।
एक गरीब मोची ने उसके लिए दो जूती गांठ दी।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
राजा के पैर में कांटा लगा और पूरी धरती पाट ली।
एक गरीब मोची ने उसके लिए दो जूती गांठ दी।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
श्रद्धा अपराध है, धोखा है, फरेब है, झूठ है और अन्याय है।
जानते हैं गर तो कैसी श्रद्धा दुस्साहस से ही मिलता न्याय है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
जो ले हथियार हाथों में वो भगवान नहीं।
तेरे राम मेरे राम, हत्या कोई समाधान नहीं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
पाली और संस्कृत में कौन सी लिपि कितनी पुरानी।
इतिहास तो छोड़िए संस्कृत ने कहानियां भी चुराली।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
ईमां ख़ूबसूरत नज़ाकत के साथ इत्मीनान रखता है।
बेईमां जीतने की ख्वाहिश लिए सिर्फ़ इलज़ाम देता है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
नाकामयाबियां देख दुनिया मुझ पर हंसती है।
लकीरें हाथों की देख कर मुझे उम्मीद रहती है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
एक डर तमाशे का था पर अब वह भी नहीं रहा।
सरे आम इश्क़ के इज़हार में कोई पर्दा नहीं रहा।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
ख़ुद बूढ़ा बूढ़ों से ख़ुद को आशीर्वाद दिलाता।
फिर खिंची फ़ोटो को हमे चौराहे पर दिखाता।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
खंड खंड में पाखंड छिपा ये धर्म है या सहिए आडंबर।
ठीक करें चार्वाक, बौद्ध, सिक्ख या कहिए श्वेतांबर।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत से उम्मीद रहती है बदलाव की लूटने की नहीं।
सवाल पूछने पर जो जवाब दे ज़रूरत रूठने की नहीं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
यह विधान कान में शीशा पिघाल कर डाल देता है।
मनु की स्मृति में यह हिंदू दूसरों की जान लेता है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत सवाल पूछने वालों को हमेशा रखती है अपने निरोध में।
मीन कैम्फ में हिटलर ने कहा साथ तो ठीक वरना हो विरोध में।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
फिलिस्तीन और इज़राइल का बस इतना फ़साना।
इब्राहिम को सिर्फ़ एक और ख़ुदा को तीन बताना।।


कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
ब्राह्मण का ब्रह्म पर दावा झूठा क्षत्रिय विदेशियों से हारे।
भारत कहें या इंडिया देश में झूठा अहंकार करते सारे।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
मौत क्या है लोगों में रहता है जीवन भर सवाल यही।
रोज़ रात सोने पर सुबह उठते हैं क्या ये कमाल नहीं।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
धन पर कमज़ोर पकड़ और पद में हूं मैं नीचे।
दौड़ रहा यह जग सारा और मैं हूं सबसे पीछे।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
मूर्ति के एक तरफ़ लिक्खा था किस्मत की मरम्मत करालो।
दूसरी तरफ़ लिक्खा था इस मंदिर की मरम्मत करादो।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
आदिवासी सिर्फ़ नाम नहीं इन्हें मूलनिवासी जानिए।
वनवासी को जो कल रहने आए निवासी ही मानिए।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
बुद्ध दर्शन किसी भी दर्शन से ज़्यादा विधिवत है।
ज़्यादा मौलिक, वैज्ञानिक और साक्ष्य तिथिगत हैं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
चोर दानी हुआ व्यवसाय बड़ा विचित्र।
दानी ने रख लिया अकड़ के साथ चित्र।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
सरे बाज़ार अभिनेता का एक गरीब को थप्पड़ मारने का क़िस्सा था।
पकड़े गए तो घबरा कर कहने लगे कि यह फिल्म का हिस्सा था।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
स्वर्ग, बैकुंठ, मौक्ष सब सौदेबाज़ी।
धर्म की आड़ में वासना को राज़ी।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत में हुक्मरान हर बात तौल कर बोलते हैं।
पटियाबाज़ बे-तकल्लुफ़ हो कर झूठ बोलते हैं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
दलितों के घर खाना खाने की ये रिवायत।
नज़दीक चुनाव बस इसी लिए है ये सियासत।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
कमज़ोर भी हैं तो भी आस पास की भनक रखिए।
अस्त्र शस्त्र नहीं हैं तो भी अपने पास रसद रखिए।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
टनल में फंस गए अब निकले तो मोहरा बन गए।
फंसाने वाले लगा जयकार ख़ुद शोहरा बन गए।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
आज तक मज़दूरो को सिर्फ़ मज़दूरों ने बचाया।
हुक़ूमत ने आपदा ला कर उसे अवसर बनाया।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हक़ पाने के लिए कहता हूं कि लड़ा करिए।
पर पहले हक़ जानने के लिए पढ़ा करिए।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
चलो फ़िर एक तमाशा ख़त्म हुआ और राजा की ख़बरें जारी हैं।
हिमालय, बैंक, मीडिया, धर्म, किसान, चीते..सबकी बारी है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुनर धर्म, जात और लिंग का गुलाम नहीं।
किसी ग्रंथ किसी स्मृति की झूठी शान नहीं।।

कल शाम नुक्कड़ पे बुद्ध मिले कहते थे,
जो चाटते हैं हिटलर के पैर कि वो इनकी जात का है।
R1a1 लुटेरे थे राखीगढ़ी का साक्ष्य इसी बात का है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
बात समझने को मेरी तुम्हे कुछ अक्ल तो लगानी पड़ेगी।
हां,अगर अक्ल मंद है तो पढ़ने के बाद वो तुमसे लड़ेगी।।

कल शाम नुकाड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत जानती है उसकी विद्या कहां तक पहुंच पाती है।
ग़रीब की झोपड़ी तक शिक्षा नहीं पर शराब पहुंच जाती है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हरिद्वार पहुंचे नानक और बाल्टी से भेजे खेतों तक पानी।
उल्टे को गर सीधा करना हो तो कुछ दिखा के बोलो बानी।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
इंतज़ार इंतिकाम का पर सीखना और है।
जीतने की छोड़िए हारने की कसर और है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
कुछ और हर्फ थे जिन्हे सिखाया नहीं गया।
सीख ही गए तो काटा अंगूठा कहीं गया।।


कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
धन की देवी और ज्ञान की देवी पास बैठ बतियाय।
इंसान कितने पागल हैं देखो बिन जाने माने जाएं।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
सर जितने भी हैं जो मंदिर और मस्ज़िद में झुके हैं।
अंधविश्वास के कारण ये 
मानवीय तरक्की से रुके हैं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
सर जितने भी हैं जो मंदिर और मस्ज़िद में झुके हैं।
अंधविश्वास के कारण ये मानवीय तरक्की से रुके हैं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
सच ही साबित हो सकता है पर झूठ नहीं।
पूछो तो बतलाऊं मैने कैसे ये बात कही।।


कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
गर रहना है मसरूफ़, मुसलसल तो माली बनिए।
और पकड़ मज़बूत करनी है तो किसानी करिए।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
पर्ची थमा दी मंच पर बिना किसी चर्चा के बाद में।
फ़र्ज़ निभाएं बिल्ली भीग कर खर्चा ले साथ में।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
बेरोज़गार अब घुस कर संसद को करते धुआं धुआं।
योजना के बिना सीधे नीति लागू करने से शायद यह हुआ।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
आस लिए आटे की मछली लपके कांटे ओर।
खाने की लिए जीव मौके की नहीं करता गौर।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
विजेताओं को जीतने का ख़ुद पर भरोसा होना चाहिए।
जीत कर झूठ कह देतें है कि कोई भगवान होना चाहिए।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
अज्ञानी से तुलना करें तो ज्ञानी ज़्यादा भटकता।
तोते होते लोगों को यहां कुछ भी नहीं खटकता।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत देखे बिन सिसकियों के नौलखा का रोना।
राजद्रोह ख़त्म हुआ फ़िर देशद्रोह का लागू होना।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
नज़ीर बन गया था पीठासीन अधिकारियों का रवैया।
थे कभी सर्वपल्ली, ज़ाकिर रामन शंकर और वैंकैया।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमती चापलूस विज्ञापनों से करते झूठा अभिनय।
शिक्षित बेरोज़गारों को लूट रहे अरिंदम या अभिनव।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
स्वर्गीय होने को राज़ी नहीं पर लालच करें स्वर्ग का।
मुस्लिम हिंदू क्रिश्चियन सारे मूर्ख बचा कौन से वर्ग का।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
इस क़दर कातिलों के हौसलें बुलंद हैं।
चाकू की अब कोई ज़रूरत रही नहीं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
प्रापर्टी डीलर था वो जिसे सेवक प्रधान बनाया।
मंत्री प्रधान ने जी भर के दोस्तों को खिलाया।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
मुलाज़िम हुक़ूमत की आड़ में तैयार रहते हैं।
मज़लूम मुलाज़िमों को ही सरकार कहते हैं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
प्रशासनिक नैतिकता अमल में है तो यह देखें।
ज़बान बाबू की लहज़े से नरम भला रहता है।।




कल शाम नुक्कड़ पे बुद्ध मिले कहते थे,
जो चाटते हैं हिटलर के पैर कि वो इनकी जात का है।
R1a1 लुटेरे थे राखीगढ़ी का साक्ष्य इसी बात का है।।


कल शाम नुक्कड़ पे बुद्ध मिले कहते थे,
जो चाटते हैं हिटलर के पैर कि वो इनकी जात का है।
R1a1 लुटेरे थे राखीगढ़ी का साक्ष्य इसी बात का है।।




कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
दलितों के घर खाना खाने की ये रिवायत।
नज़दीक चुनाव बस इसी लिए है ये सियासत।।








कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
खोपड़ी में मत भरो तथ्यों को हलक से उतर जाने दो।
माने तो कुछ नहीं होगा बात बनेगी तुम अगर जाने तो।।






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