A January to June 2024

 कल शाम को नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,

हुक़ूमत अपने रंग आहिस्ता आहिस्ता दिखा रही है।
संस्था आंबेडकर की पर वाह पंडित जी गा रही है।।



कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
इंसान जिसके पास ज़वाब ना हो वो ही नाराज़ होता है।
नतीजे कुछ रहें इसी तरह लड़ाई का आगाज़ होता है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
फ़र्क इंसानों में, भोजन में, कपड़ों में करते हैं।
कौन हैं ये जो आज राष्ट्रवाद की बात करते हैं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
मन बहक का चोट करे दिल पर मेरे किसी हथौड़ी सा।
पास नहीं वो मंहगा लगे जो पास रहा वो कौड़ी का।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
रसो वै सः में रस क्या है और अध्यात्म कैसे मिलता है।
चदरिया झीनी रे झीनी कहते कबीर जैसे कपड़ा सिलता है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत आवाम को अपने हक़ मे हमराज़ बना लेगी।
उन्हे गुंडा,दंगाई,बलात्कारी और बदमाश बना देगी।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हाका सुन कर हाना का संसद में महुआ की याद आई।
पूंजीपतियों के दौर में ये हमारे लिए आस साथ लाई।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
एक औपचारिक निमंत्रण को प्रमाणपत्र माना जा रहा है।
हिंदू को भी वैष्णव शैव शाक्त स्मार्त में बांटा जा रहा है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
शीर्ष पर रहने की हवस धर्म को कितना बिगाड़े।
जाति, संप्रदाय, पंथ, वर्ण, लिंग और ये अखाड़े।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
8 PM का सूत्र अब 7 PM में बदल दीजिए।
सर्दियां हैं छोटे दिनों की बता वजह दीजिए।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
समझ तुम्हारी तुम ही पर निर्भर मेरा केवल प्रयास।
मेरी बातें तुम तक पहुंची देखें लगेगा कैसे कयास।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
मुश्किल है डर का लगना और न्याय का छुप होना।
विक्रम बेताल की कहानी में जैसे नायक का चुप होना।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
EVM और बैलेट का झगड़ा पुराना है।
जीते तो ठीक मगर हारे तो छुड़ाना है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत ग़लत है तो उसकी भी मज़म्मत करना।
बिक चुके नामर्दों में मुन्नवर को मुज़क्कर कहना।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
करोड़ों ले कर ये बड़े माननीय बेच रहे हैं न्याय।
जो क़ीमत लगा लें वो संसद सदस्य बन जाए।।

कल शाम नुक्कड़ पे बुद्ध मिले कहते थे,
लोगन राम खिलउना जानां, पैकेज ब्रांडिंग नाम।
धर्म दशरथ पुत्र में फंस गया तेरे मेरे शामिल नाम।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
एक चोर पहर पिछले मेरे घर आया।
ये अहसास मुझे कुछ होने का लाया।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
सुन्नी सिर्फ़ दो पर टिके हैं शिया और दो जोड़ देते हैं।
मज़हब की दास्तां में ख़ुद इंसान इतने मोड़ लेते हैं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
सुकूं से निकल जाए ये जान बस तम्मन्ना है।
मसरूफ़ हूं अभी सुकूं पाने के लिए।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
दुःख में जो याद करे उसकी क़ीमत दो कौड़ी की।
सु:ख में याद करें तो उसे नहीं ज़रूरत पौड़ी की।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
बुद्ध की तरह तुम ख़ुदा को भी अवतार बता दो।
तर्क में कमज़ोर हो षडयंत्र कर ख़ुद ही जता दो।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमती नेता क्या करते हैं।
डराते हैं वहीं ख़ुद डरते हैं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हर शाख पर EVM और रिटर्निंग ऑफिसर लटके हैं।
चंडीगढ़ की घटना यहां लोकतंत्र के मन में खटके हैं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
बेलछी कांड की यादें सिर्फ़ हाथी पर चढ़ने से जुड़ी।
मर्दों की हुक़ूमत में पाती मौका एक हारी हुई कुड़ी।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
बेलछी कांड की यादें सिर्फ़ हाथी पर चढ़ने से जुड़ी।
मर्दों की हुक़ूमत में पाती मौका एक हारी हुई कुड़ी।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत के अर्थशास्त्र में ये आसान है बिल्कुल मुश्किल नहीं।
खाए मुफ़्त 80 करोड़ देश में इतनी लाचारी मुमकिन नहीं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत ख़ुद अफ़वाह फैला रही है।
पंजाबी में लिख कर बटवां रही है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत किस को बिठा गोदी में हम को ठगती है।
इलेक्टोरल बॉन्ड पर चुप्पी देख ये बात लगती है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
खाड़ी मुल्कों का दौरा एक मरहम की तरह।
मुल्क में सोचते हैं देखो मुसलमान किस तरह।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
अभिव्यक्ति व्यक्ति पर निर्भर है धर्म विशेषण मुक्त।
भगवान को ढूंढने लग गए जो भी लगा उपयुक्त।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
घाट से मोह हो गया नदी सरपट बहती जाए।
घाट तीर्थ बन गए लोग नदी को भूलते जाएं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
ट्रैक्टर ही तो है ये कोई टैंक तो नहीं है।
ये ज़मीन से जुड़े हैं कोई बैंक नही है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत के दौर में खंबे लोकतंत्र के ढह गए।
ख़बर कहां अख़बार अब इश्तहार बन गए।।


कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत ये वोट बैंक को जेवड़ी के बराबर रखदें।
रत्नभारत और पीठज्ञान रेवड़ी के बराबर समझे।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे
भक्त भगवान को पिता माने फ़कीर कहे माशूक़।
ख़ुद मिट्टी में मिल जाना है बस साथ रहे ताबूत।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
भाव करे पत्थर को ईश्वर और ईश्वर को चट्टान।
सिखाने को इतना भर ही ना बना कोई संस्थान।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
सीमाओं पर ज़मी घट रही हैं माँ की नींद उचट रही हैं।
हो सब रहा है लेकिन सरकारी रपट नहीं आ रही हैं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
ख़बरनविस ये बातों में तेज़ तर्रार नहीं ये बस है पैसे की भूख।
गारंटी संविधान की, अधिकार की बताने में कर जाते हैं चूक।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत कमज़ोर हुई तो मांगी हैदराबादी दवाई।
माया जैसे छेत्रप चूके तो जीत ध्रुवीकरण से आई।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
40 मिनट नाचने के लिए रिहाना ने 70 करोड़ लिए।
पता करो की पांच साल नाचने के कितने किसे दिए।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
अब तो रिटायरमेंट का इंतज़ार भी रिवायत रही नहीं।
ये माननीय इस्तीफ़ा दे कर खुल कर आना चाहते हैं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
छप्पन भोज और सोलह श्रृंगार भी कम लगते हैं।
सेठ के लौंडे की शादी को हम नुमाईश कहते हैं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत की नज़र-ए-'इनायत हो गई।
ग़लतफ़हमी फेसबुक पर आम हो गई।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
सेठ की शादी है या है कोई फजीता।
ऑडिट बताएगा कितना लगा पलीता।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
द्वंध कौरव-पांडव, राम-रावण, कृष्ण-कंस सिर्फ़ मन का तकाज़ा है।
तराज़ू के पलड़े में पड़ा मन का भटकाव सिर्फ़ जीत या जनाज़ा है।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
कहते थे कि विदेश के स्विस बैंक से काला धन मंगाएंगे।
आज देश का बड़ा बैंक कहता है कि नाम नही बताएंगे।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत आवाम को भटकाने के लिए पत्ता फेंक देगी।
SBI के मामले की आग में CAA की रोटी सेंक लेगी।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
क़ानून नागरिकता का या हरियाणा की उठा पटक।
इलेक्ट्रॉल बॉन्ड की ख़बर को दबाने की है सनक।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
स्वामी नहीं भिक्षु कहा बुद्ध ने थे जो शिष्य पास।
जो मिलता है ले लेना ना ले मन में कोई आस।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
वकालत सिर्फ़ खड़ी है वकीलों की औकात से।
न्यायमूर्ति सोचे सिर्फ़ वकीलों के तर्क वाद से।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
ऊर्जा, शिक्षा, शैली, समझ और दिया निस्तार।
साम, दाम, दंड, भेद और फ़िर किया गिरफ़्तार।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
1971के बांग्लादेश के जन्म में किसका था उपकार।
नमन रक्षा मंत्री को जिसका था नाम जगजीवन राम।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत की औकात नही संविधान का मूल ढांचा बदलना।
केशवानंद भारती केस की 13 जजों की बातों को समझना।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत ने चुन रखें हैं क़िरदार मुसलमान मरने की लिए।
आवाम का ध्यान भटकाती है एक एक कर टपकाती है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत ने चुन रखें हैं क़िरदार मुसलमान मरने की लिए।
आवाम का ध्यान भटकाती है एक एक कर टपकाती है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
पलटू दास कहें आभूषण पहली आवश्यकता थी पुरुषों की।
ख़ुद धारण करता नहीं ना धारण किसी गर्भ में उत्पत्ति की।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत ख़ुद मालदीव बांग्लादेश चीन की छुपाती है घात।
लाल आखें तो दूर की कौड़ी आंख उठाना भी बड़ी बात।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
भौंडी दलाल मीडिया की रिहाई पर हरकते क्या है।
सत्यमेव जयते के बजाए कहती है कि शर्तें क्या हैं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
जनाज़े तय करते हैं कि इंसान था कैसा।
शादियां तो लिबास और खाने की रस्म है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत ने मित्रों कह कर बॉन्ड से चंदा ले लिया।
चार यार मिल गए फ़िर चारो ने कंधा दे दिया।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
टैक्स तो देते नहीं पर करोड़ों देते हैं चंदा।
शैल कंपनी करती हैं बस इतना ही धंधा।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
वैल्थ क्रियेटर और सनातन का थामे झंडा विद्रोह का।
गौरव झूठा, भक्त नया बंदबुद्धि शिक्षक है ये गोह सा।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
काम से लौटकर भी वो काम पर लौटती हैं।
औरतें फ़िर भी ख़ुद को ख़ुदमुख्तार कहती हैं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत का बस चले तो वे इसे रोज़गार कह ठेलेगी।
आवाम जो मोबाईल पर बना के क्रिकेट टीम खेलेगी।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत अख़बारों में प्रश्न वाचक के साथ वाक्य छपवाती।
अफ़वाह झूठ ग़लत बातें फैला कर भावनाएं बदलवाती।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत अख़बारों में प्रश्न वाचक के साथ वाक्य छपवाती।
अफ़वाह झूठ ग़लत बातें फैला कर भावनाएं बदलवाती।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हाथी की खिचड़ी की तम्मन्ना लिए बैठा है सुबह से।
कंवल कमल पर उतारू गोदी में जाने की सुलह है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हर लड़की अपनी माँ को दोहराती हर लड़का अपने बाप को।
आगे से दोनो सतर्क रहना अगर तुम झगड़े बच्चों के पास तो।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
ना तो अति प्रेम ना अति उपेक्षा करें आप मध्य रहे।
मछिमनिकाए से आगे बढ़ने की सम्यकता को सध्य करें।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
ये दुनिया मतलब की यही कहते फिरते हैं।
लोग यहां पर जो इसी मतलब में रहते हैं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
वेद कंठ में अटक गया सूखी अमृतधार।
रूखे सूखे रहे माने शिक्षित ख़ुद को आप।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
घुसपैठियों की बात करें तो ये फ़िर लम्बी जाएगी।
मूल निवासी छोड़ फ़ेहरिस्त में आर्य जाति आएगी।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
कद्र ख़ुद मंगलसूत्र की जिस धर्मपति ने रखी नहीं।
फूट डालो शासन करो की बात इसमें नहीं कहीं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
चार सौ पार में सिर्फ़ बीस जोड़ना है।
चड़ीगढ़, सूरत फ़िर इंदौर तोड़ना है।।



कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत का धर्म है जब ठीक समझे अफ़वाह फैलाना।
कल बम था आज होने को है कल कुछ अलग होगा।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
एक ये ज़िद तुम्हारी कि यहां चुनाव हो ही ना सके।
फ़िर ये कैसे मुमकिन है कि तुम संविधान मानोगे।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
शिक्षापीठ विद्यापीठ गुरुकुल और गलगोटिया।
धंधे करते व्यापारी सेंके नई शिक्षा की रोटियां।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
अफ़ीम लेते हो या चरस को आदि हो।
तुम अंधे हो जो कुछ दिखाई नहीं देता।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
ब्रह्मचर्य का अर्थ है सिर्फ़ नंपुसकता से।
मर्दानगी को ढूंढने की जरूरत क्या है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
पड़ौस में रहता हूं पर तुम्हे मालूम नहीं है।
कहूं तुम ही में रहता हूं तो बैचेन हो जाओ।।


कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
मास्टर ट्यूशन पर कुछ ज़्यादा हैं मेहरबान।
स्कूल में पढ़ाने की ज़हमत ही नही लेता।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
ठेकेदारी प्रथा ने तबाह किया है गरीब मज़दूरों का हक़।
गलगोटिया जैसे बर्बाद करेंगे छात्रों को नहीं इसमें कोई शक।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
ज़िक्र मंगलसूत्र गिरते हुए पुरुष की अंतिम कुंठा है।
ये दांव लगाता परित्याग करता नपुंसकता छिपाता है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
भूखे का धर्म क्या है क्या है भूख की पहचान।
लाश पड़ी सड़ गई हो रही प्रार्थना और अज़ान।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे, 
भूखे का धर्म क्या है क्या है भूख की पहचान।
 लाश पड़ी सड़ गई हो रही प्रार्थना और अज़ान।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे, भूखे का धर्म क्या है क्या है भूख की पहचान। लाश पड़ी सड़ गई हो रही प्रार्थना और अज़ान।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत बाज़ नही आती झूठ भी बोले हक़ से।
गरिमा क्या चीज़ है सच की क्या औक़ात समझें।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
खूँ का थक्का जम ना जाएं सीरम हम मर ना जाएं।
हुक़ूमत मसरूफ़ चुनाव में कहीं धर्म ना कम हो पाए।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
मानव भूगोल पढ़ा जिसने वो ही तो समझ ये पाएगा।
मानव स्थानांतरण कैसे था ये शिक्षक कैसे बताएगा।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत ने रोड़ टैक्स ले ही लिया फ़िर कैसा टोल टैक्स।
तनख्वाह से काटे टैक्स फ़िर इन चीज़ों पर कैसा टैक्स।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
FSSAI की पेस्टीसाइड नीति पर किसकी नज़र है।
प्रचलित मसालों में ज़हर है या मसाले ही ज़हर हैं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
प्रज्वल रेवन्ना जैसे वहशी को भी भक्त आज का युगांतर माने।
ये भक्त ही कहते हैं दोषी हैं लीला को जो करते उजागर सारे।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत झूठ लिख संस्कृत में वाक्य छाप देती है।
छद्म धर्म हिंसा तथैव च: लिख कर जान लेती है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
लाईक करें और खुशखबरी मिलेगी अगले घंटे पांच में।
दल्ले भगवानों के डाले फोटों मुर्ख़ भक्तों की आस में।।

कल शामनुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
क्रांतिकारियों की कार्य शैली में बस एक कमी होती है।
जानते नहीं कि मिल जाने पर हुक़ूमत करना क्या है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
चूड़ियां पहनाने को प्रधान सेवक भी दिखाते हैं।
लड़ाई आपसी है पर महिलाओं को ले आते हैं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
बड़ी मुश्किल से कच्छे से पतलून मिली थी।
खड्डा जो किया पार तो कहीं फट ना जाए।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
कब्ज़ जैसी बीमारी है विचारों का दिमाक़ में सड़ जाना।
कुछ आए दिमाक़ में आपके तो मिल कर मुझसे कहिए।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
धीमी और गहरी श्वास में सधा अनापानसती योग।
दुष्ट बाबा रट्टू तोता बन कहें पूर्वजन्म का भोग।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
केंचुआ कहे रीढ किस अंग का नाम है यहां कौन खड़ा है।।
अंकल, मीडिया, प्रशासन, नेताओं में चापलूस कौन बड़ा है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
बौद्ध स्तूप शिवलिंग बने ख़ुद बुद्ध बने अवतार।
अंधभक्तो के जाल में ना माया मिली ना राम।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
अनपढ़, नाकाबिल, कट्टर सोच का गला घोट देंगें।
रात बाक़ी है कल सुबह हम आश्रम जा वोट देंगे।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
चलो आज एक नेक काम मुक़म्मल तो हो गया।
अब मुल्क की किस्मत है जिधर भी चले जाए।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
ख़्याल रखते हैं कि बेख़बर रहे हम से।
यही ख़्याल उन्हे मेरे पास रखता है

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
गांधी को देखते हैं ये सिर्फ़ फ़िल्म के चश्मे से।
जैसे झुमका जो बाज़ार में बरेली के गिरा था।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
टीवी पर आने की चाहत है उसे पूरे दिन मतदान के।
ध्यान लगा मंदिर में बैठे पूरी तैयारी और पहचान के।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
केंचुआ कहे रीढ किस अंग का नाम है यहां कौन खड़ा है।।
अंकल, मीडिया, प्रशासन, नेताओं में चापलूस कौन बड़ा है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
ध्यान, तपस्या, अध्यात्म के आड़े आता इनका चश्मा।
फ़ोटो खींचते फोटोग्राफरों को भी इनको कुछ भी कहना।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
परिस्थिति कैसी भी रहे आप बदलिए नहीं।
मनिस्थिति अपनी हमेशा आप बनाए रखिए।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
दूध और खून समान हैं स्रोत है केवल एक ही शरीर।
सात्विक कह लेते रहे माने द्विजन शाकाहार प्रतीक।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत ने पहले ही कहा कि होगा उसका बूथ मज़बूत।
केंचुआ,EVM,BLO, दफ़्तर,संचार हैं इसके कई सबूत।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
लेवल पलेइंग फिल्ड बिगाड़े मक्खनबाज़ नितांत।
पैसे के लालच में अंधा हुआ किशोर बना प्रशांत।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
चलिए देखें आज ये बात भी साफ़ हो जाएगी।
जम्हूरियत संविधान को कितना बचा पाएगी।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
चुनाव पर्यवेक्ष भी कमाल के हैं।
मतलब मेरा सीधा दलाल से है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बद्ध मिले कहते थे,
ख़ालिस सियासत थी कोई नाम राम का नहीं।
नरेंद के किसी नारों में आज जय श्री राम नहीं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
आधा अधूरा शिलान्यास, आधा अधूरा ज्ञान।
आधी अधूरी हुक़ूमत पर पूरी आन बान शान।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
लैन पतारी टॉपर बैठें गिनकर पूरे आठ।
NTA 67 बच्चों को कहती टॉपर आज।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
पैरों पर लपकते हैं चचा मौकों पर आजकल।
पलटने से ख़ुद के डरे कहें ले शपथ शामतक।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत कुछ यूं भी कश्मीरी आवाम में शांति रखती है।
नशे में डुबाती जवानों को जो कौम क्रांति करती है।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत चाहती है संस्थाएं बैमौत मर जाएं।
एक विश्विद्यालय को मरता मैं देख रहा हूं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
अयोध्या में हार द्विज को सच लगी नहीं।
सच है कि जीत दलित की पच नहीं रही।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
रडार से बचने जैसे बादलों में छिपे विमान ये लड़ाकू।
रिजल्ट चुनाव परिणाम के दिन सोचें नीट के पढ़ाकू।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
चरित्रवान अकड़ा हुआ है शीलवान विनम्र।
चरित्रवान में तर्क कसौटी शीलवान में मर्म।।

कल शाम नुक्कड़ पीआर बुद्ध मिले कहते थे,
राईट विंग और लेफ्ट विंग में बंटती दुनिया सारी।
छाती पीटती मीडिया गोदी में आ कर बैठी आधी।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
जिसे नुकसान उठाना नहीं आता वे क्या जाने फ़ायदा क्या है।
हवस में डूब कर सिर्फ़ देखते हैं जल्दी नफ़े का क़ायदा क्या है।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत ने ग़रीब बच्चों को उच्च शिक्षा से रोक दिया।
एक करने में CUET को बिना विचारे ये थोप दिया।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
काम छिपा अंत: में पर लोग पूछे अर्थ से राम।
दशरथ पुत्र से अर्थ नहीं क्यों भटके सारा गांव।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत लगता है जान बूझ कर पेपर लीक करती है।
रोज़गार देना नहीं दिखावे का क्रिएट सीन करती है।।


कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक्मरान जाहिलिय्यत में मुफ़लिसी को भी बहाना बनाते।
दुर्घटना बड़ी बात नहीं, देखो रेलमंत्री मोटरसाइकिल चलाते।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
सुबोध जवाब दे रहे पर चुप्पी प्रदीप लगाए।
NTA के दामन में बच्चे दाग दिखाते जाए।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
तुम ही ने जलाया नालंदा अब बोलते हो खिलजी था।
पुष्यमित्र शुंग देता था इनाम कटे सरों की गिनती का।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत संस्थानों से कहे लटका के रखें निदान को।
न्याय बिंदु आस जगाती इंसाफ मिले हर इंसान को।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
साहित्यिक घोटालों की शुरुआत की पहचान आपको आज हम कराते।
साहित्यकार सिंधु सभ्यता और बौद्ध युग के बीच वैदिक युग बताते।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
हुक़ूमत का हुक्म नीट-नेट छोड़ भक्ति में हों सांवरिया।
फ़िर सावन आया ले झोले सब बन जाओ कांवड़िया।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
तलाक़ या डाइवोर्स शब्द नहीं इस पर ज़ोर देते हैं।
जूती समझ पांव की अधर्मी धर्मपत्नी छोड़ देते हैं।।


कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
यह सड़क संसद में बदल जाए या यह संसद ख़ुद सड़क हो।
नीतियों में गरीब, शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ की झलक हो।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
नोटो की सलवटे बताती हैं वो किसके पास था।
जितनी ज़्यादा सलवटे होंगी वो उतना ग़रीब था।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
धर्मग्रंथों से छेड़छाड़ कर करते हुक़ूमत को इंप्रेस।
बदल माएंने झूठ भी बोले एक गोरखपुर का प्रेस।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
बढ़ते वज़न से परेशा हैं तो तरकीब अपनाएं।
रात को रोटी सब्ज़ी छोड़ सिर्फ सलाद खाएं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
याद है माथा टिकाया था संसद पर फ़िर संसद बदल दिया।
अब माथा टिका कर संविधान पर वो क्या कर दिखाएगा।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
आदमी की नियत है हमेशा परेशां होना।
गर्मी को कोस कर बरसात पर हैंरा होना।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
ये सपने अपनी दुनियां को ख़ुद ही बुन देते हैं।
दिल की बात को दिमाग़ के तत्व सुन लेते हैं।।

कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले कहते थे,
ब्रह्मा का मंदिर एक है, विष्णु के कुछ, महेश के मंदिर अनंत।
पैदा तो तुम हो ही गए जीवन चलता ना जाने कैसे होगा अंत।।































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