लगभग चार साल पहले मैंने फेसबुक पर "कल शाम नुक्कड़ पर बुद्ध मिले..........." लिखना शुरू किया था. मैं सरकारी  सेवा में हूँ लेकिन साथ - साथ समाज में रहता हूँ, वोट देता हूँ और जीवित होने के कारण मानने के बजाए जानने की कोशिश करता हूँ . इस लिए हर शाम को नुक्कड़ पर जाता हूँ और बुद्ध से मिल कर उनसे सलाह मशवरा करता हूँ . बुद्ध हमेशा पद्य में ही बात करते है, ठेरों संकेत, कई इशारे और कई सटीक निशाने. आइए नास्त्रेदमस. की भविषवाणियों सी इनमें अर्थ खोज सके से खोज ले. 

 पढ़ने के बाद आपकी भावनाएं बदल सकती है और आप खुद ही अपनी भावनाएं आहत कर लेगे, इसीलिए अपने जोखिम पर ही मेरे ब्लॉग पर आएं, पढ़ने आएं, जानने आएं .  


 




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